तारातला हादसे में पूर्व मेयर फिरहाद एवं दो पार्षदों के नाम शिकायत दर्ज; मरने वालों की संख्या हुई 17
'गायब डिजिटल सबूतों' की खोज में ईडी
कोलकाता। जमीन कब्जा और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों में गिरफ्तार किए गए रसूखदार पुलिस अधिकारी शांतनु सिन्हा विश्वास अब अपने अचानक गायब हुए मोबाइल को लेकर ईडी के निशाने पर हैं। ईडी को पूरा अंदेशा है कि करोड़ों के इस घोटाले से जुड़े अहम डिजिटल सबूतों को नष्ट करने के मकसद से ही इन फोन को सोची-समझी साजिश के तहत गायब किया गया है।
ईडी सूत्रों के मुताबिक, बीते 15 मई को जब शांतनु पूछताछ के लिए सीजीओ कॉम्प्लेक्स स्थित केंद्रीय एजेंसी के दफ्तर पहुंचे, तब उनके पास इस्तेमाल किए जाने वाले दोनों मोबाइल फोन में से एक भी मौजूद नहीं था। गिरफ्तारी के बाद भी जांच एजेंसी उनके पास से कोई फोन बरामद नहीं कर सकी। जब कड़ाई से पूछताछ की गई तो उन्होंने बेहद गैर-जिम्मेदाराना दावा किया कि उनके फोन खो गए हैं। हालांकि, एक अनुभवी पुलिस अफसर होने के बावजूद फोन खोने की कोई भी शिकायत किसी थाने में दर्ज न कराना, जांच अधिकारियों के गले नहीं उतर रहा है।
जांच एजेंसी का मानना है कि किसी भी बड़े आर्थिक अपराध में मोबाइल फोन कॉल रिकॉर्ड, व्हाट्सऐप चैट और लोकेशन के लिहाज से सबूतों की खान होते हैं। इसी मामले में पहले गिरफ्तार हो चुके कारोबारी जय उर्फ जयेश कामदार के जब्त फोन से सोना पप्पू और शांतनु के बीच जमीन कब्जाने से जुड़े कई अहम वित्तीय लेन-देन के चैट और दस्तावेज मिले हैं। इसके अलावा, शांतनु के करीबी कोलकाता पुलिस के सब-इंस्पेक्टर राहुल अमीन के घर हुई छापेमारी में भी मोबाइल जब्त हो चुका है, लेकिन मुख्य आरोपी शांतनु का फोन गायब है। ईडी का अनुमान है कि 9 मई को राज्य में हुए सत्ता परिवर्तन के बाद से लेकर 15 मई को पेशी के बीच मिले समय का फायदा उठाकर ही इस डिजिटल डेटा को ठिकाने लगाया गया है।
शातिर दिमाग अधिकारी यह बखूबी जानता था कि फॉरेंसिक तकनीक से डिलीट डेटा भी वापस आ जाता है, शायद इसीलिए वे सीधे फोन ही गायब कर बैठे। हालांकि, ईडी को शांतनु के फोन की आखिरी सक्रिय लोकेशन मिल चुकी है और अब तकनीकी संकेतों के आधार पर मोबाइल बरामद करने के लिए शिकंजा कसा जा रहा है।